क्या कहे हमें जिन्दगी से क्या चाहिए
मौत के इंतजार में बस जीने का हौसला चाहिए
न चाहिए रौशनी न ख़ुशी न रंग न किसी का संग
और न ही चमन से बहारों का सिलसिला चाहिए
मौत के इंतजार में बस जीने का हौसला चाहिए
अंधेरो में जीने की आदत है रौशनी का क्या करू
गम में पीने की आदत है ख़ुशी का क्या करू
ऐसे बेरंग जीवन को रंगो की क्या जरूरत है
खामोश लव ही ठीक है होठो की हसी का क्या करू
हमें अब बस वक़्त से मुकद्दर का फैसला चाहिए
मौत के इंतजार में बस जीने का हौसला चाहिए...........
बुधवार, 9 जनवरी 2008
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