अकेले हैं तो क्या अकेले ही तलवार उठाएंगे
यूँ घुटते हुए जीने का गम तो नहीं रहेगा
मेरा सौभाग्य तो तब होगा जब
हँसते हुए माँ भारती के गोद में सो जायेंगे
फायदा क्या है बर्बाद हो कर मरने का
बात तो तब बनेगी जब
माँ के दुश्मनों को बर्बाद कर जायेंगे
सहेंगे न सितम किसी भी जुल्मी का
हम तो जुल्मी पे कहर बरसायेंगे
गम नहीं होगा हमें तब भी
जब अकेले ही टकराकर मिट जायेंगे
गम तो नहीं रहेगा के हम माँ के काम नहीं आये
इसलिए हे माँ तेरे चरणों में
हम अपने प्राणों की बलि चधायेंगे,
हँसते हुए माँ भारती के गोद में सो जायेंगे
शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2008
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