अकेले हैं तो क्या अकेले ही तलवार उठाएंगे
यूँ घुटते हुए जीने का गम तो नहीं रहेगा
मेरा सौभाग्य तो तब होगा जब
हँसते हुए माँ भारती के गोद में सो जायेंगे
फायदा क्या है बर्बाद हो कर मरने का
बात तो तब बनेगी जब
माँ के दुश्मनों को बर्बाद कर जायेंगे
सहेंगे न सितम किसी भी जुल्मी का
हम तो जुल्मी पे कहर बरसायेंगे
गम नहीं होगा हमें तब भी
जब अकेले ही टकराकर मिट जायेंगे
गम तो नहीं रहेगा के हम माँ के काम नहीं आये
इसलिए हे माँ तेरे चरणों में
हम अपने प्राणों की बलि चधायेंगे,
हँसते हुए माँ भारती के गोद में सो जायेंगे
शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2008
सोमवार, 11 फ़रवरी 2008
जीवन की नाव चलती जाती है
जीवन की नाव चलती जाती है
पतझर में सावन में रेत में सागर में
जीवन की नाव चलती जाती है
सोचते हैं लोग अभी उम्र ही क्या हमारी
मगर उम्र चुपके से ढलती जाती है
रूकती नहीं तूफानों में भी
ठोकर खाकर चट्टानों से भी
बढ़ती है बस बढ़ती जाती है
जीवन की नाव चलती जाती है
दास्ताँ अजीब है इस जीवन की भी
गम हो तो भी मुस्काती है
रोती नहीं कभी भी खुद पे ये
और न ही जीने वालो को रुलाती है
जो जीवन को समझ नहीं पाते
आंसू तो बस उनके हिस्से आती है,
जीते तो सब हैं मगर
जीवन के साथ सब नहीं जी पाते हैं
जिन्दगी गुलाम हो जाती है उसकी
जो जीवन को ख़ुशी से गले लगाते हैं,
इन्सान समझ जों ले इसे तो अच्छा है
ये बेफिक्र होकर बढ़ती जाती है
जीवन की नाव चलती जाती है
पतझर में सावन में रेत में सागर में
जीवन की नाव चलती जाती है
सोचते हैं लोग अभी उम्र ही क्या हमारी
मगर उम्र चुपके से ढलती जाती है
रूकती नहीं तूफानों में भी
ठोकर खाकर चट्टानों से भी
बढ़ती है बस बढ़ती जाती है
जीवन की नाव चलती जाती है
दास्ताँ अजीब है इस जीवन की भी
गम हो तो भी मुस्काती है
रोती नहीं कभी भी खुद पे ये
और न ही जीने वालो को रुलाती है
जो जीवन को समझ नहीं पाते
आंसू तो बस उनके हिस्से आती है,
जीते तो सब हैं मगर
जीवन के साथ सब नहीं जी पाते हैं
जिन्दगी गुलाम हो जाती है उसकी
जो जीवन को ख़ुशी से गले लगाते हैं,
इन्सान समझ जों ले इसे तो अच्छा है
ये बेफिक्र होकर बढ़ती जाती है
जीवन की नाव चलती जाती है
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